· मन न चले इसकी भी एक कला है, सीखो (शान्त) l
· जो शुरू किये हो उसे पूरा करो, वरना बहुत कुछ अधुरा रह जावेगा l
· क्या करना, क्या नहीं करना असमंजस है, असमंजस में मत रहो l
· कल की तारीख व दिन जानने के लिए आज के तारीख व दिन का ज्ञान आवश्यक है l ठीक इसी तरह कल बनाने के लिए आज पर विचार आवश्यक है l
· किसी के जीवन में एकान्तवास और शून्यता आवश्यक है l
· जिसने पिछली घटनाओं से कुछ सीखा नहीं उसे कठिनाई का सामना करना पड़ेगा l
· जीवन में विश्वास तो मनचाही बात की पूर्ति से होता है l
· जीवन को व्यवहार में उतारो, हवा में मत सोचो l
· साथ वाला क्या सोचता है क्या कहता है, सोचो l
· ऐसा काम न करो जिसे बाद में भूलने की कोशिश करनी पड़े l
· भय कमजोरी है, यह तुम्हें विचलित करता है l
· अपने में रहने से आयु बढ़ती है l
· शरीर को मन से अलग रखो l
· सबसे अधिक और ठोस सीख तो मनुष्य को अपनी करनी और रहनी से ही मिलता है l
· सभी लगाव अस्थाई हैं पर जीवन में गम्भीर परिवर्तन लाने में सक्षम है l
· गन्दा व्यवहार सबसे पहले गन्दा करने वाले को प्रभावित करता है, बाद में औरों को l
· आतुरता भयानक है चाहे वह जिस परिस्थिति में हो l
· दूसरे के भरोसे किसी काम की शुरूआतत मत करो अपने सामर्थ्य पर ही भरोसा करो l
· चुप रह कर देखो, प्रकृति पर विश्वास बढ़ेगा l
· कुछ कहना है तोसिर्फ एक से कहो वही सुनेगा l
· मन में प्रश्न न उठना शान्त चित्त का लक्षण है l
· अपने कर्मो में विश्वास करो, क्षमता बढ़ती है l
· लक्ष्य सही होने पर मार्ग मिल जाता है l समय को पहचानो न देर करो न जल्दी l
· प्यास से भी आदमी मरता है और पानी में डूब कर भी , पानी, की अधिकता और कमी दोनों खराब है l समरस की कामना करो l
· जो कार्य खुद नहीं कर सकते उसे दूसरों को करने की शिक्षा मत दीजिए l
· प्रातः उठने से पहले शान्त रहिये l
· अपने रहने और चलने का तरीका खुद बनाओ l
· अपने को समझने के लिए आकाश की ओर देखो l
· जो तुम देखते हो, वह कह नहीं सकते l
· काम करना सिखावो आराम करना नहीं l
· किसी का भरोसा मत करो तुम अपना काम स्वयं कर सकते हो गौर से देखो l
“देने को टुकड़ो भलो, लेने को गुरू नाम l
इस भव में आई के, कर लीजै दो काम ll “
· तू न भगवान बनो, न भगवान का प्रतिनिधि l अपना प्रतिनिधित्व करने में तुम जुट जाओ l बहुत भय है कि कहीं अपने आप से अलग न हो जाँय l बहुतेरे मनुष्य प्राणियों को अपने आप में नहीं देखता l एक क्षण भी अपने आपके पास नहीं ठहर पाते l सुबह चल रहे हैं, शाम चल रहे हैं, सोने में चल रहे हैं, जागने में चल रहे हैं, चलते में चल रहे हैं l कोल्हू के बैल की तरह अपने आप से दूर हो जाते हैं l इसका बहुत भय है l
· पशु और मनुष्य के बीच एक विशेष अन्तर यह है कि मनुष्य अपने स्वभाव, विचार और चिन्तन को बदल सकता है, जो पशुओं के लिये असाध्य है l मनुष्य में और पशु में इतना ही अन्तर है l मनुय गलत काम करता है और बार-बार करता है l वह खुद ही अपने आपको माफ नहीं कर सकता l अपने आपकी अवहेलना के सिवाय और कुछ नहीं कर सकता l
· चेहरे की सुन्दरता भाव पर है, सफाई और पाँलिश पर नहीं l
· जग का कारण शिव ही है, सार्वभौम सत्य है l
· मुर्ख वह है, जिसको अपने हानि-लाभ का ज्ञान नहीं है l
· घटनायें सदा कुछ दे कर जाती हैं l
· मानव जीवन में किसी की सहायता की जरूरत नहीं है अगर वह नियमित है, अगर कोई साथी मिल भी जाय तो निश्चित रूप से उसे स्वच्छ और दृढ़ विचार वाला होना चाहिए अन्यथा संकट ही होगा l
· विश्वास से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, अविश्वास से पाप शरीर में डेरा डाल देता है l
· सत्य शून्य होता है, सून्य में ही सब पैदा होता है और सब विलीन हो जाता है , अतः शून्य ही सब कुछ है l
· कर्म बन्धन है l
· मनुष्य को शंकर के गले का नाग होना चाहिए, जैसे कि नाग कीचड़ में से निकलकर भी स्वच्छ व निर्मल होता है l
· आदमी कितना नासमझ है जो पाकर भी नहीं समझता कि हमें क्या मिला l
· वहाँ मत झुको जहाँ सभी झुकते हैं, झुकना हो तो झुकने की जगह बनाओ l
· वाणी के अनुसार ही व्यवहार बदलता है, बोल देने के बाद वाणी ही तुम्हीरी मालिक बन जाती है और और फिर उसमें सुधार करना कठिन है, इसलिये वाणी पर नियन्त्रण रखो l
· मनुष्य भगवान से बहुत कुछ मांगता है, उसे मिलता भी है पर वह उसको नहीं जानता है और किस चीज से उसे लाभ है उसे नहीं मालूम है इसी समस्या को लेकर भक्त शिष्य व श्रद्धालु सभी परेशान है l
· जो भी आदमी दूसरों की भलाई के लिए काम करता है उसके सब गुनाह माफ हो जाते हैं l
· जो धन किसी तिजोरी में जमा हो वह धन नहीं लोभ है l
· जो एक के पास से दूसरे के उपयोग के लिए जाय वही धन है और उतना ही धन है l
· नक्सलवाद की उत्पत्ति नागरिकों के आम समस्या पर ध्यान नहीं देने के कारण ही है, ईसमें सरकार ही दोषी है l
· आज का लोकतन्त्र बहुत ही कमजोर हो चुका है, क्योंकि दलों ने नैतिकता खो दी है , इससे राष्ट्र के साथ-साथ दलगत हित का भी नुकसान हुआ है l
· मनुष्य कहीं भी जाय तो इस बात का ख्याल रखे कि उसके एक दिन के आचरण का प्रभाव लोगों के दिमाग में उसके जीवन के लिए अमिट छाप छोड़ देता है l
· आसुरी शक्तियों का होना बहुत जरूरी है लेकिन उसका उपयोग खतरनाक है l
· पुराना स्थान छोड़ने पर ही नया स्थान मिलता है, कुछ पाना है तो कुछ छोड़ना होगा; देखो जिसने छोड़ा वही पहुँचा l
· जमीन शुद्ध या अशुद्ध नहीं होती, जहाँ पर भी सन्त का चरण पड़ जाय अथवा यन्त्र-तन्त्र की स्थापना हो जाय वही स्थान पविज्ञ हो जाता है l
· सज्जन पुरूष की पहचान चेहरा तथा वाणी है l
· आश्रम एक आवश्यकता है l
· सच्चा मनुष्य आकर्षण का केन्द्र बिन्दु है l
· तुम्हारे हितैषी हैं, जरूरत पर सामने आ जायेंगे l
· क्षमा करने की क्षमता प्राप्त करो l
· नशा तो जीवन का रास्ता ही बदल देता है, इससे बचिये और बचाइये l
· क्या अपने कार्य का रोज आंकलन करते हो ?
· नवयुवक यदि विवेकी लोगों का साथ करें तो उनका और समाज का उत्थान जल्द ही सम्भव है l
· मनुष्य स्वयं ब्रह्म है l
· माँगों मत, लेने के काबिल बनो l
· तुम किस लिये आये हो समझो l
· किसी के पास जाने से पहले उस पर विश्वास करना होगा l
· सशक्त के अग्रसर होने में कहीं भी रोक नहीं होता l
· न सभी गुरू के पात्र हैं, और न सभी मनुष्य शिष्य के पात्र है l
· बच्चों के कार्य पर, उनकी बातों पर पुरा विचार करो l
· परिवार नारी का नहीं बच्चों का होता है, बच्चों के लिए होता है, बच्चों में ईश्वर के प्रति श्रद्धा आवश्यक है l
· बच्चों को प्यार देना चाहिए पर उनके विकास के लिए थोड़ा सख्त भी होना चाहिए l
· बच्चों को अपने कुल और परम्परा को अवश्य बतायें l
· बच्चों को स्पष्ट बोलने की छूट होनी चाहिए जो बच्चा साफ नहीं बोलता, वह भीतर ही भीतर कमजोर होता है l
· बच्चों की आँखों में देखो l
· बच्चों पर नाराज होने से पहले अपना बचपन याद करो l
· बड़े लोग छोटे लोगों को गलत काम करने का प्रोत्सान देते है l
· बच्चों को निरंकुश छोड़ना देश के साथ खिलवाड़ करना है l
· बच्चों को व्यवहार दो, शिक्षा नहीं l
· बच्चों के अच्छे या बुरे संस्कार के लिये माता-पिता जिम्मेदार है l
· बच्चों को दण्ड देकर आप सच्चाई नहीं जान सकते बल्कि दण्ड देकर उनको झूठ बोलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं l
· अच्छे और गलत व्यवहार को बच्चे भी समझते हैं l
· जहाँ तक बच्चों के लिए बिगड़ने या बनने का सवाल है यह वातावरण और साथ पर निर्भर करता है l माता-पिता को बड़ी सावधानी से इनके वातावरण और साथ पर निगाह रखना चाहिए l यदि बच्चों को ठीक बनाना है तो अपने अन्दर की भावनाओं पर भी नियन्त्रण रखना होगा l बच्चे उसे पढ़ लेते हैं l बच्चों के भगवान तो माता-पिता ही है l ईर्ष्या, द्वेष, घृणा और अहंकार से भरा मानव अपनी ओर नहीं देख पाता l इसी मानसिकता में बच्चे पलते हैं l आधुनिक शिक्षा से बच्चों को बाहरी दुनिया की जानकारी होती है, पर अन्तःमन की जानकारी नहीं होती जहां अच्छाई और बुराई का मापदण्ड है l
· बच्चों की शिक्षा में किताबी ज्ञान के अलावा चरित्र का ज्ञान देना आवश्यक है l और साथ-साथ यह भी बताना आवश्यक है कि चरित्र के बिना किस तरह का नुकसान होता है l
· न्याय के लिए स्वयं बलि देना पड़े तो भी सस्ता है l
· अन्यायी का नाश किसी भी तरह करना धर्म है l
· न्याय के लिए इन्तजार करना पड़ेगा l
· अन्याय के खिलाफ अन्याय करना भी न्याय का रास्ता है l
· न्याय दबाने से दबता नहीं है l
· अन्याय के विरूद्ध लड़ना ही युवक का धर्म है l
· अन्याय तो निर्बल पर होता है l
· अन्याय का विरोध ही जवानी है l
· अधिकारी की मानसिकता सही नहीं होने पर न्याय की आशा करना अंधापन है l
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· अभ्यास न करने से चित्त निकम्मा हो जाता है l चित्त के निकम्मा होने से जीवन निकम्मा हो जाता है l अभ्यास करने से जो परोक्ष है वह भी प्रत्यक्ष हो जाता है और जागृत, स्वस्थ, सबल हो जाता है l अभ्यास न करने से आलस्य, निद्रा और जम्हाई ये तीनों अल्पायु कर देते हैं, मौत के नजदीक ले जाते है l अभ्यास करने से जीवन महान कल्याणकारी होता है l मै ऐसा ही समझता हूं l
· संयमी जीवन सुख देने वाला, शान्ति देने वाला होता है l संयमी जीवन परमार्थ की पगडंडी पर ले जाता है l मैं ऐसा ही समझता हूं l जिसका जीवन असंयमी है/ वह शोकातुर है, कलुषित काया है l संयम रखना चाहिये l जिसका जीवन संयमी है वह साधु है l चचल-चित भटकत दिन राती l' उसको कुछ नहीं सुझता है l जिसका जीवन संयमी है उसको सब कुछ सूझता है l ऐसा ही मै समझता हूँ l

जिस कृत्य के करने से कीर्ति उत्पन्न हो, उसे करना चाहिये l जिस कृत्य के करने से अपकीर्ति उत्पन्न हो, उसे त्यागना चाहिये l कहो, अच्छे फलदायक कृत्य क्या हैं ? बहुतेरों के अवगुणों को न जानना, न देखना, न सुनना, ये फलदायक कृत्य हैं l कहो अपकीर्ति क्या है ? बहुतेरों की बुराइयों को सुनते रहना, आदर्शहीन आचरणों को देखते रहना, दम्भी के पूजा-पाठ को सुनना, देखना और धारण करना अपकीर्ति उत्पन्न करता है l इस तरह का श्रम, व्यायाम स्वस्थ फल को देने वाला नहीं है l जितने लोगों को जितनी अधिक जानकारी होगी, वह तुम्हारे मस्तिष्क को दबाव दे सकती है, प्रफुल्लित नहीं कर सकती, स्फूर्ति नहीं दे सकती, उत्साहित नहीं कर सकती l इससे बचना चाहिये, ऐसा ही जानना चाहिये l
· तुम खड़ा होना सीखो, ठहरना सीखो l
· जो खुद को नहीं पढ़ता, वह क्या पढायेगा l
· क्षमता से बाहर मत सोचो, मत करो l
· आप प्रयास करें थके नहीं, वह अथक प्रयास चाहता है l
· किसी तरह दिन काटना ठीक नहीं है, वह तो कट ही जावेगा l
· अपने से निर्णय लेना सीखो l
· किसी के भरोसे मत बैठो l
· आज की छोड़ कल की मत सोचो l
· समर्पित व्यक्ति ही सफलता की कुंजी है l
· विरोध करने वाले से भी उसके कर्म को भूल कर प्रेम से मिलो l
· अगर विरोध न हो, रात न हो तो सफलता और दिन का सुख ही न मिले l
· रात को रात की तरह बिताओ, सजग होकर l
· अंहकार मत करो, ब्रहाण्ड में तुम्हारी पृथ्वी भी एक कण की तरह है l
· जैसे रखा जाता है रहो, कूद-फांद मत करो l
· बुरे से बुरे आदमी के कष्ट का निवारण करो l
· तुम जिसका बन चुके हो, उसी के रहो l
· व्रत करना है तो अपने को सभाँल कर रखो l
· तुम्हारे अन्दर मणि है, खोज करो l
· हम कैसे रहें सीखो, उपवास में कम से कम इतना ज्ञान तो होना चाहिये l
· चलते रहना अच्छा है l
· आकाश के नीचे रहना ठीक है l
· कर्त्ता बनने की कोशिश मत करो सब समझ में आ जावेगा l
· काम की शुरूआत और अन्त दोनो ही भला हो तो ठीक है l
· न कुछ लेकर आये थे ओर न कुछ लेकर जायेंगे l
· काम खत्म होने पर ही विश्राम का आनन्द है l
· तुम कल के जिम्मेदार नहीं हो, आज अन्त सोचो l
· कार्यक्रम चलाते रहो, सहयोगी आते रहेंगे l
· सिर्फ इन्तजार करने से मिलना नहीं होता l
· मन में दया भाव रखो, सुखी रहोगे l
· पाप पुण्य के बखेड़े में मत पड़ो, जिस काम के करने में संशय हो या छुप कर करने की जरूरत हो मत करो l
· एक दिन में एक मिनट भी शुन्यता प्राप्त करो l
· कुछ छोड़कर भी विवाद से बचो l
· धन संग्रह करना ठीक है, पर श्रम से चालाकी से नहीं l
· शान्ति के साथ धीरज आवश्यक है l
· कोई धोखा नहीं देता, गलत आशा धोखा है l
· कर्ज लेकर सुखी होना एक भयंकर भूल है l
· कम में रहना सीखो, बच्चे स्वयं सीख जायेंगे l
· तुम जिससे आशा करते हो, उनके पास तुम्हारे लिए समय नहीं है l
· हल्ला करने से आपकी बातें नहीं सुनी जा सकती l
· किसी को गाली देकर उसकी गलती नहीं मनवा सकते l
· दूसरे की गलती भी आपकी गलतीती मानी जा सकती है l
· अनुभवी लोगों की बातें समझनी चाहिए l
· दिन भर में कितना परिवर्तन आपमें होता है सोचिये l
· किसी को सम्मान देने से आप छोटा नहीं होते l
· अपने कर्मो पर विचार नहीं करना बड़ा ही दुःखदायी है l
· जल्दी न करो विश्वास करो दुर्गन्ध दूर हो जावेगा l
· विष देना ठीक है, पर विश्वास देना ठीक नहीं l
· व्यवहार कुशल बनना एक लम्बी प्रक्रिया है l
· अपनाना सीखो छोड़ना नहीं l
· कोई अजनबी नहीं है, उदार बन कर देखो l
· जहाँ जरूरत होगी पहुंच जावोगे l
· स्वस्थ रहने के लिए कुछ भी करना चाहिए l
· लाख दबाव के बाद भी अपने चरित्र व सद्व्यवहार पर कायम रहो l
· अच्छे दिनों की याद से समय का सदुपयोग होता है, विशेष लाभ तो व्यक्तित्व पर निर्भर है l
· दिमाग मिनटों में बदल जाता है, इस पर अभ्यास करो l
· भागने पर ग्रह पीछा करता है, रूकने पर रूक जाता है l
· किसी का पीछा मत करो यह अन्धे करते हैं l
· बहुत नजदीक रहने वाले से भी जीवन की गोपनीय बातें मत बताओ l
· सत्य को जानने वाले से ही सत्य बोलो l
· संकल्प सिद्ध है, संकल्प करो इच्छा नहीं l
· किसी से सहायता की आशा मत करो l
· तन मन से स्वस्थ रहने की कामना करो l
· जो कुछ मिला है, उसके लिए नित्य नमन करो l
· कम बोलना सीखो, सही बोलना आ जावेगा l
· भटको मत कोई स्थान तो अपना बनाओ l
· क्या सोचते हो, चल दो पहुँच जावोगे l
· जहाँ जाना चाहते हो, वहीं देखो, वहीं सोचो वरना भटक जावोगे l
· सोच विचार कर निर्णय, फैसला करो, निर्णय लो तो निबाहो l
· सोचो कि दुनिया में क्या तुम्हारा है, कोन तुम्हारा है l
· सहारा उसका लो जो तुम्हें बेसहारा न बना दे l
· किसी की बुराई न देखो न सुनो l
· बुरे के अच्छे काम में सहयोग करो, उसे सुधरने का अवसर मिल जावेगा l
· किसी से मिलने के पहले अपने पर विचार करो l
· साथ रहकर भी अकेला होना अच्छा है, सीखो l
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