और नरक यही है हम सब कुछ सोच नहीं सकते है l बैठ नही सकते है चल सकते है बुद्धि विकृत है l परिवार दुःखित है लड़के कही और है बीबी कही और है बेटा कुछ कहता है माता कुछ कहती है मालुम पड़ता है कि नरक है l तो ये कुछ दुर नहीं है कल्पना में कुछ भी कहो बहुत ज्यादे कही जाती है जिसने देखा नहीं स्वर्ग और नरक देखा नहीं कल्पना ही है तो लोग उसके बारे में बहुत कुछ कहेंगे l
किसी ने गाय नहीं देखा हो l उसके बारे मे वर्णन पढ़ा ही हो तो गाय के बारे में वह पूर्णरूप से समझ नहीं सकता लेकिन जिसने गाय एक बार देखा तो गाय कहते ही गाय के बारे में जान लेता है उस तरह से वह स्वर्ग है तुम देखो l निश्चिन्त हो एकाग्र हो बच्चे सुखी है l बीबी प्रिय हैं l माता आदर देती हैं पिता हर परिश्रम करके उचित उपार्जन करता हो, धार्मिक हो l यही स्वर्ग है l इसी का वर्णन लोगों ने पुस्तक में बहुत ऊँची-ऊँची भाषाओं में किया है l
और यही नरक है l स्वर्ग और नरक इस शरीर के बाहर जाने के बाद नहीं होता l क्योंकि संशय से ही जीवन मृत्यु भोग और कर्म की बात आती है संशय से मुक्त हो जाओ तो सब ठीक है l तुम मुक्त हो l
· ये चूँकि भिन्न-भिन्न लोग हैं किसी चीज को हम कुछ समझेते हैं आप कुछ समझेते हैं l हमारी बात को आप मिथ्या कहते हैं आपकी बात को हम कहते हैं संसार में मिथ्या नाम की कोई वस्तु नहीं है l झुठ कुछ है नहीं l सब सत्य है झूठ कहने के लिए है करने के लिये नहीं है सत्य आचरण के लिये है झूठ कहने के लिये है l l झूठ कुछ है नहीं l सब सत्य है झूठ कहने के लिए है झूठ का आचरण नहीं होता है l सत्य का आचरण होता है सत्य आचरण में निबद्ध हो l झूठ वाद-विवाद में निबद्ध है l झूठ का कोई आचरण नही है l झूठ बोलने के लिये है l झूठ कहने के लिये है l झूठ समझाने के लिये है सत्य व्यवहार के लिये है l
· अहिंसासा कायरता नहीं है किसी को नहीं मारना अहिंसा नहींहै l अहिंसा है अपने अन्दर इस तरह के भाव उत्पन्न नहीं होना l जिसको हमें बार-बार दबाना पड़े l बार-बार अपनी भावनाओं को कुत्सित मत कर दबाना विकृत विचार उठना ये सब जब होते है l मनुष्य उनको दबाने कीकी बात सोचता है ये हिंसा है l हम लोगों को चाहिये ऐसा भाव ही उत्पन्न न हो कि विपरीत परिस्थितियाँ उत्पन्न हो l ये अहिंसा की बुनियाद है l
अहिंसा तभी होती है l उन भावनाओं पर जिनको हमें फिर दबाना नहीं है l उन भावनाओं पर जिनको हमें फिर दबाना नहीं पड़े l जब कभी दबाते हैं चाहे कुकृत्य हो, दुष्कर्म हो उसे नहीं विचारते l अहिंसा का आधार ही वही है l जहाँ कि हम हिंसा का नाम ही भूल जाते हैं l कोई भी दबाव मानसिक हो बाहरी, हमको न करना पड़े l और ये तभी सम्भव है और उसी आदमी से सम्भव है जो निष्काम हो और ममता न हो लोभ न हो l स्वार्थ की भावना सीमित हो त्याग की भावना हो l बलिदान की भावना हो दूसरे की लेने की भावना न हो l दूसरे के कुकृत्य या दुष्कर्म देखने को भावना न हो किसी को कटाक्ष करने की भावना न हो l निन्दा न सुनने की, न कहने की भावना हो ऐसे लोगों में ही अहिसा की बुनियाद होती है l अब तुम लोग सोच सकते हो कि कितने लोग अहिसक हो सकते हैं और बारे में सोचते हैं और अहिंसा का तो मजाक है ''अहिंसा परमो धर्मः''l
धर्म नाम व्यवहार का है तो अहिंसा पर हम उतरते हैं और व्यवहार पर उतरते हैं तो अजीब सासा अलग सा लगता है शाब्दिक किसी को मारने का जहाँ तक सम्बन्ध है जिस पृथ्वी पर हम खड़े हैं जहाँ हमारा पैर पड़ता है न मालुम कितने जीव उसके नीचे है l पैर के नीचे चलते समय कितने जीव-जन्तु मरते हैं कहो कि अहिंसा है ये तो हिंसा नही है l धर्म व्यवहार है व्यवहार है और वही धर्म है और तभी अहिंसा की बात होगी l धर्म व्यवहार का नाम है l धर्म आचरण है धर्म ऐसी वस्तु नहीं है किकि जिसका सिर्फ उदाहरण दिया जाय कि धर्म यह बात है धर्म वह बात है धर्म ऐसे करना चाहिये l इस तरह का कोई धर्म नहीं जो हम सरलता से व्यवहार कर सकें l जिस व्यवहार से हमें खुशी हो l आनन्द हो l कभी दुःख उत्पन्न न हो l वही व्यवहार है तब शायद हमारे उस व्यवहार से लोगों को तकलीफ मालुम होती हो l सारी विपरीत परिस्थितियाँ हमारे सामने आ जाय सम्भव है फिर भी हम खुश होंगे l क्योंकि हमारा आचरण जो है हमारे अनुकूल है l सुखदाई है हमें उससे दिक्कत नहीं है धर्म हुआ और तभी ऐसा सम्भव है l जब हम व्यवहार में इतना स्वच्छ रहें इतना स्पष्ट रहें कि दुनियाँ को अपने आस- पास के लोगो को किसी की परवाह किये बिना कौन हमसे खुश होता है कौन दुःखी होता है इसकी परवाह किये बिना हम अपना धर्माचरण करें l सारा समाज विरोध में हो जाय l सारी दुनियाँ विरोध में हो जाय अगर हमारा व्यवहार हमारा आचरण हमारी सच्चाई ठीक जगह पर है तो कभी न वो लोग वश में होंगे फिर नहीं भी हो तो हमारा क्या जाता है कभी भी धर्माचरण दूसरों को देख के नहीं होता है अपने अन्दर देख के होता है l और इस तरह से अहिंसा की बात लोग करें l
· सफल कार्य प्रणाली में विश्वास के साथ धैर्य आवश्यक है l
· दुःखी की सहायता के लिए सर्वदा तैयार रहो l
· मृत्यु कभी भी असमय नहीं होती l
· असहाय वह है जो खुद को नहीं पहचानता l
· आचरण रहित व्यक्ति नीचे देखकर बातें करता है l
· प्यार में पला हुआ मनुष्य दृढ़ तथा सबल होता है l
· कठिनाई से मनुष्य को सबल बनने की प्रेरणा मिलती है l
· वासना के उत्पत्ति का अवसर न दें l
· भ्रष्टाचार का एकमात्र उपाय संगठित प्रयास है l
· पति-पत्नी को मित्र की तरह रहना होता है l
· दुःखी तथा क्रोधी मनुष्य से सुख तथा शान्ति की आशा गलत है l
· आवश्यक काम बिना हुए नहीं रहता l
· राम का अर्थ है समदर्शी, न्याय रक्षक तथा त्यागी l
· रोगी के पास स्वस्थ एवं खुशदिल मनुष्य को रहना चाहिए l
· बड़ों का कभी भी अपमान नहीं होता l भय छोड़ कर भगवान बन जाओ l
· पिता का एक वचन भी जीवन भर सहायक बना रह सकता है l
· प्रेम अमर है, बदलता नहीं बदल देता है l
· असहाय तुम्हारी मदद चाहता है l
· रोगी के लिए दवा विश्वास का जन्मदाता है l
· बीमार होने से भी फायदा होता है l
· कभी-कभी बुद्धि भी साथ नहींदेती, यही होनहार है l
· रूपया से समय अधिक कीमती है l
· ईर्ष्या एक महान रोग है l
· क्रोध सामने वाले में वास करता है l
· सत्य की विजय होती है, परन्तु परिश्रम से थक जाने के बाद बिल्कुल अन्त में , इतना इन्तजार सब नहीं करते, इस वास्ते आज इसका अभाव नजर आता है l
· योग्यता मरते-मरते भी मनुष्य को उच्चतम स्थान दिला सकती है l
· आतताईयों का मुकाबला करना सामाजिक तथा धार्मिक काम है l
· सूर्योदय के पहले निशा अवकाश प्राप्त कर चुकी होती है l
· कभी-कभी वस्तुओं का अपहरण या विनाश भी सन्तोष पैदा करता है , पर वह तो लाचारी होती है, सन्तोष नहीं lश्रम करना ठीक है l
· श्रम पर श्रद्धा होनी चाहिये तो आनन्द मिलता है, पैसा भले ही न मिले l
· परिश्रम का महत्व जीवन में बहुत बड़ा है , हर रोज थक जाने तक शारीरिक श्रम अवश्य करना चाहिए , अगर थक जाने पर शारीरिक श्रम नहीं मिलता तो यह मनुष्य का दुर्भाग्य है l
· यदि मनुष्य आलस्य करे तो कोई भी वस्तु लाभ्य नहीं है l
· अपनी मान्यता के अनुसार मनुष्य मनोकामना सफल करता है l
· अधिकतर लोग खुश करने के लिए ही किसी की शिकायत करते हैं, जबकि उस शिकायत से वे भी वंचित नहीं है l
· भगवती रक्षा करे जब गलत लोगों का साथ हो जाय या जब गलत विचार पैदा हो जाय l
· जब भी भेद पैदा हो जाय तो तुरन्त उसका परित्याग करना चाहिये, जिससे भेद हो l
· अगर किसी को बड़ा मानें तो उसकी बातों पर ध्यान देना होता है, वैसे किसी को बड़ा मानने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ कहना मानना ही बड़े को खातिर देना नहीं होता, इसके बाद भी एक ऐसे भाव की जरूरत होती है जो खूब भीतर से उसका आदर करे यह बड़ा मानने वाले का गुण है l
· अक्षर का मतलब जिसका कभी नाश नहीं हो , अक्षर का ज्ञान सब चाहते हैं, उस अक्षर का ज्ञान जिससे शब्द बनते हैं परन्तु उस अविनाशी का ज्ञान नहीं हो पाता l
· कभी-कभी अपने नजदीक के लोगों को कष्ट देकर भी सहयोग करना पड़ता है l
· प्रकृति ने जीवन सरल बनाने के विस्तृत साधन दिये है पर पुरूष उसका उपयोग समय पर नहीं कर पाता l
· क्या आपके वर्तमान आचरण से आप और आपका समाज सन्तुष्ट है l
· किसी से कुछ कहना व्यर्थ है, नुकसान सह कर भी चुप रहना अच्छा है l
· अपने सन्तानों को बनाने के लिए आपको बुरी आदतें छोड़नी होगी l
· शिक्षा और सम्पत्ति मिलकर मानवता को विनाश के कगार पर ले जा रही है, इससे बचने के उपाय क्या हो सकते है l
· लोग तुम्हारे बाहरी विकास से प्रभावित होते हैं उनको तुम्हारे अन्तः करण से क्या मतलब l
· जो लोग तुम्हारे साथ होने का दावा करते हैं, वह स्वार्थपरस्त है l
· लोग तुम्हारे विकास से प्रसन्न नहीं होते हैं, वे स्वार्थ की आशा से प्रसन्न होते हैं l
· किसी भी आदमी में सिर्फ अच्छाई या बुराई नहीं होती, दोनों होती है l
· सिर्फ कपड़ा या पैसा देकर गरीबी दूर नहीं की जा सकती l
· बहुत से लोग दया का दुरूपयोग करते हैं l
· लोग तुम्हारा इन्तजार करते हैं, कुछ लेने के लिए क्योंकि उनके पास देने को कुछ है ही नहीं l
· आदमी बदल सकता है, पर समय आने पर l
· कभी-कभी सुधारके लिए दण्ड जरूरी होता है l
· आज कोई राष्ट्रीय त्यौहार नहीं रह गया l
· तुम अपने पर विश्वास नहीं करते और यही दुःख है l
· शरीर सोता है, मन नहीं सोता l पढ़ने और सीखने में अन्तर है l
· तुम्हारे साथ वादा करने वाले कई हैं, करने वाले एक दो l
· आप सीखे ही नहीं तो सीख क्या देंगे l
· अच्छा दीखने और अच्छा दिखाने में अन्तर है l
· मूर्ख अपनी जिम्मेदारी नहीं समझता l
· आदेश दो तो पालन कराने की क्षमता भी रखो l
· समर्पण का अर्थ है विवादरहित होना l
· किसी का इन्तजार अच्छा नहीं है l
· विद्धालय के झगड़े का कारण शिक्षकगण होते हैं l
· बहुत से लोग पद पर रहने पर ही संस्था में रहते हैं l
· सिन्दूर कुमारी में बिजली का काम करता है l
· आज की सरकार तो कागज पर चलती है कागज से सावधान रहें l
· गुमराह लोगों को अपने लाभ हानि का पता नहीं होता l
· सामने वाला बुरा है तो तुम क्या उससे अच्छे हो l
· व्यवहार और कानून में स्पष्ट अन्तर होता है, पर कानून तो कानून है l
· तुम्हारा अन्त क्या होगा, सोचो l
· मदद किससे और क्यों चाहते हो सोचो l
· गरीबी अपने को पहचानने नहीं देती l
इनको टुकड़ा दे के करे तब सत्संग ll ‘
अघोरेश्वर वाणी, गुरू - वाणी
· सेवा वृत्ति से दृष्टि दोष खतम हो जाता है l
· सर्वप्रथम उसका ख्याल रखिये जो आपकी सेवा करते है l
· सेवा-भाव से प्रेरित वह कर्म है जो कुछ कर्म करके आन्नद लेने का मार्ग प्रशस्त करता है l
· स्वशरीर सेवा-शरीर को इस भाँति रखने की क्रिया l जिससे शरीर का विकास हो तथा स्वस्थ रहने का विश्वास पैदा हो l नियमित जीवन, सामयिक तथा सन्तुलित आहार-बिहार नित्य अपने कर्मो का अध्ययन प्रमुख क्रियायें है l सन्निकट लोगों की सेवा-जिसमें परिवार, साथी सहयोगी, अन्य समाज के लोग जिनका साथ है ही इन सेवाओं में दक्ष लोग, ही गुरू भगवान की सेवा में सफलता प्राप्त करते हैं l
· समाज में काम करना और आत्मलीन रहने में एक बड़ा ही संघर्ष है जो प्रत्यक्ष है l यदि समाज में रहना है तो समाज को अपने अनुकूल बनाना होगा और नहीं तो सामाजिक दुर्दशा में घुटना और मरना होगा l
· भारतीय समाज सिर्फ पुरूषों का है l
· समाज सुखी रहेगा तभी मैं भी सुखी रहुँगा l
· बुरे समाज में जीने से समाज रहित रहना ठीक है l
· समाज की कुरीत्तियाँ आत्मा को पसद नहीं l
· जनता देश की आत्मा है इसे सन्तुष्ट रखना होगा l
· मजदुर को पूरी मजदूरी के साथ पूरी प्रतिष्ठा दो l
· धन चाहे जिस तरह एकत्र किया जाय वह सामाजिक अभिशाप है l
· शिक्षा समाज के लिए है, व्यक्ति के लिए नहीं l
· गलत तरीको को बदलो, नहीं तो समाज छोड़ दो l
· समाज को लोकसेवक रखने होंगे l
· शासन की कमजोरी से निरीह जनता धाँधली की चक्की में पीस दी जाती है l
· आज की पुलिस भक्षक है l
· असहाय की सहायता करना अपनी सहायता करना है l
· व्यक्तिगत कार्य से अधिक महत्व सामाजिक कार्य की है l
· सरकारी कर्मचारी के सामाजिक नहीं होने से शासन बदलता है l
· आज जन जागरण करना ही सामाजिक धर्म है l
· जहाँ ग्रामवासी एक हो जाते है, वहाँ स्वयं एक सरकार बन जाती है l
· धन से समाज पर शासन करना असम्भव है l
· राजनीति अन्थी नहीं है, तुम अन्धे हो l
· अगर मजूदर को भोजन नहीं मिलता तो क्रान्ति कमजोर पड़ जाती है l
· शासन की कड़ाई अपने तरीके पर होनी चाहिए न कि आदमी पर l
· समाज अन्धा है तथा अन्धे की तरह ठोकर मारता है l
· जनता की भलाई करने वाला जनता को ढूँढता नहीं l समाज का रूप बदलना हो तो स्वयं बदलो l
· जब तक समाज मे नारी शिक्षित नहीं होगी, परिवार सुखी नहीं बन सकता l
· यह शरीर तुम्हारे चाहने वालों द्वारा ही दफनाया जायेगा l
· कोई एक ही चीज ढूँढो l
· पैसे की कमी से परिवार में कलह बढ़ता है l ऐसे अवसर पर सबको अपने पर दबाव डाल कर सच्ङित भाषा का उपयोग करना चाहिए l
· किसी कार्य में विश्वास के साथ हाथ बंटाने से सफलता मिलती है l
· किसी काम के करने का तरीका काम करने से आता है, सुनने से ही नहीं आता है l
· सर्वदा प्रसन्न रहने वाला व्यक्ति बड़ा से बड़ा कार्य अति सुगमता से कर सकता है l इसलिए मनुष्य की प्रथम खोज प्रसन्नता की होनी चाहिए ऐसी प्रसन्नता जो छूटे नहीं l
· मानव जीवन का एक अभिन्न अंग अध्ययन है , अध्ययन से बुद्धि एकाग्रता को प्राप्त होती है l अध्ययन से कर्मक्षेत्र के दुविधाओं से निबटने की शक्ति मिलती है l एकाग्र व्यति विश्व शक्ति की ईकाई है l
· मनुष्य को अकेला ही काम करना है l यदि मनुष्य हो तो अकेला रहना, अकेला चलना, अकेला करना सीखो l यदि एक ईश्वर सब कुछ है तो तुम अकेला भी चल सकते हो l
· किसी भी चीज की असलियत जानने के लिए उसके निकट जाना आवश्यक है l परिस्थिति का अन्दाज भी उस परिस्थिति में रह कर मनन करने से होता है l कोई भी मनुष्य साधारण नहीं है l अवसर पहचान कर जागरूक मनुष्य असाधारण काम कर सकता है l
· कार्य में लगे हुए व्यक्ति को ही सहायता मिलती है , विचार सहायक की आवश्यकता भी नहीं पड़ती l
· अपना विश्वास तथा आत्मबल ही सफलता की जड़ है l
· अगर कार्य ठीक है तो आज या कल उसे होना है l देर या सवेर l प्रयास तूफानी गति से चलाना चाहिए l
· मनुष्य का कोई भी प्रयास विफल नहीं जाता , प्रयास लगन से करते रहना ही सफलता है l
· जीवन में एकान्तवास का बहुत बड़ा महत्व है l एकात में मनुष्य अकेला नहीं रहता l वह ईश्वरीय शक्ति से विमर्श करता है l
· मन एक है, इसे एक कर्म मे लगाना ठीक है l
· किसी भी कार्यक्रम को लगातार चलाने से सफलता दीख पड़ती है l बीच में समय दूसरे कार्य में देने से उस कार्य मे शिथिलता आती है l
· निश्छल मनुष्य ही निर्भय होता है l
· ईश्वर पर पूर्ण विश्वास करने वाला निश्छल होता है l
· एकात रहने से मानसिक बल मिलता है l
· आत्मा दूसरे को सम्मान देने से सम्मानित होता है l
· अपने सम्मान के प्रयास से घमंड या अभिमान पैदा होता है और आत्मा का प्रकाश क्षीण होने की सम्भावना बनी रहती है l
· मनुष्य जीवन में बड़ी-बड़ी समस्याओं पर भी सुस्ती से काम बिगाड़ देता है l कभी-कभी बहुमूल्य अवसर भी खो देता है l
· बेकार रहने से बुद्धि तथा बल घटता है l
· एकान्तवास जीवन को उच्च तथा शान्तिप्रिय बनाने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है l किसी भी कीमत पर कुछ समय एकान्त में व्यतीत करना वायु के इतना आवश्यक है l
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